११.११.११....उम्मीदों का पिटारा...
सौ बरस में सिर्फ एक बार ही ये तारीख आती है,इस बरस हम भी गवाह बनेगे इस तारीख के और ढूंढेंगे कि इस भाग्यशाली तारीख को कितनों का भाग्य बदल गया | इत्तेफाक से इसी दिन मुझे अपने होमलोन कि चेक पास करवानी है और पिछले महीने ही दशहरा और दीपावली मनाई है,मुझे तो पता चल ही जाएगा कि इस दिन भाग्य मेरा कितना साथ देगा |सौ साल पहले इस दिन हम अंग्रेजों के गुलाम थे और अब अंग्रेजियत के गुलाम हैं |तब हम अंग्रेजों से लड़ रहे थे और अब तो लड़ने के लिए हमें किसी बाहरी की जरूरत ही नहीं है|बैर का जो बीज अंग्रेज़ डाल कर गए थे आज वो एक मज़बूत पेड़ बन चुका है और जाति,धर्म,सम्प्रदाय,क्षेत्र की टहनियां हमारे खून से पोषण पा रही हैं|रही सही कसर राजनीतिक दल के नेता इसे खाद-पानी देकर पूरी कर रहे हैं| आज़ादी के ६४ साल बाद भी क्या हम इस शुभ तारीख का स्वागत कर सकते हैं |क्या इस दिन देश में कोई भूखा नहीं सोयेगा ,आतंक का शिकार होकर कोई अपना लाल नहीं खोएगा ,कोई किसी ख़ास धर्म,जाति में जन्म लेने पर नहीं रोयेगा अगर इसका जवाब मिल जाए तो मै कहूँगा कि हम सबको इस तारीख का स्वागत करना चाहिए| बाज़ार में तारीख का टोकरा तैयार हो चुका है इस दिन को बेचने के लिए एस.एम्.एस . तैयार हैं|कुछ लोग इस दिन घर,गाडी लेने के लिए तैयार हैं|अपने शहर की भी बात कर लेता हूँ ,इस शुभ तारीख को पूरे दिन बिजली आएगी,पानी की धार आएगी,कही नहीं होगी लूट,महिलाओं से छेड़खानी की नहीं होगी छूट ..शाम को सड़क किनारे ले सकेंगे दो घूँट तब समझ में आएगी इस तारीख की महिमा|तमाम बुराइयों के बावजूद एक अच्छी बात हो सकती है कुछ महिलाओं ने इस दिन को माँ बनने के लिए चुना है,इस दिन एक माँ की जीत जरूर हो सकती जब इस तारीख को जन्म देने वाले बच्चे के जन्म से पहले ये पता नहीं करेगी कि आनेवाला मेहमान लड़का है या लड़की |
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