Friday, 9 December 2011

उमा भारती को सुनना ऐसा लगता है जैसे हाई टेक मोबाइल के ज़माने में लैंडलाइन टेलीफोन की ट्रिन

उमा भारती को सुनना ऐसा लगता है जैसे हाई टेक मोबाइल के ज़माने में लैंडलाइन टेलीफोन की ट्रिन
-ट्रिन..........हेलो टोन,कॉलर टोन के नए-नए ऑफर के बीच में अगर आपको लैंडलाइन की वही पुरानी ट्रिन-ट्रिन सुनाई देगी तो कैसा लगेगा |भाजपा कीराष्ट्रीय नेता और आगामी विधान सभा चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश की प्रभारी उमा भारती को सुनने का मौका मिला तो मुझे कुछ ऐसा ही महसूस हुआ जैसा मैंने अभी ऊपर लिखा |राम मंदिर काल में भाजपा के जिन नेताओं का उदय हुआ वो अब भी पुराने ढर्रे पर ही चल रहे हैं|उत्तर प्रदेश के चुनाव सिर पर हैं और भाजपा के पास नेता नहीं हैं |मुझे लगता है मायावती से मुकाबले के लिए भाजपा ने पिछड़ी जाति की महिला को चुना लेकिन उमा भारती आज के वोटर को आकर्षित कर सके ऐसा कुछ नहीं दिख रहा है|







 

Sunday, 4 December 2011

जहाँ मॉल-मॉल में सोने की चिड़िया करती है बसेरा ,वो भारत देश है मेरा..

जहाँ मॉल-मॉल में सोने की चिड़िया करती है बसेरा ,वो भारत देश है मेरा......                                                       

पता नहीं क्यों जब-जब रिटेल ऍफ़.डी.आई. से जुडी खबरें देखता-पढता हूँ ये पैरोडी गुनगुनाने लगता हूँ |इस गाने की असल पंक्तियाँ हम सभी ने सुनी होंगी कम से कम २६ जनवरी और १५ अगस्त को तो जरूर सुनी होंगी|अर्थशास्त्र,व्यापार,वाणिज्य के मामले में बहुत कमजोर हूँ ,नहीं जानता कि वालमार्ट ,टेस्को आ जाएगी तो मोहल्ले के भोलू पंसारी कि दुकान बंद हो जाएगी क्या ? दुकान के दरवाज़े  इतने अहम् हो गए हैं कि दिल के दरवाज़े बंद हो जायेंगे|संसद नहीं चल रही है,धरना-प्रदर्शन सब हो रहा है ,अंजाम नहीं जानता |जब भारत सोने की चिड़िया थी तब भी विदेशियों की पहली पसंद थी और अब जब सवा अरब की मार्केट तैयार हो गयी तो विदेशी फिर लूटने आ रहे हैं|हम सब अपनी आबादी को कोसते रहते हैं ,इस आबादी का सिर्फ एक फायदा है वो है मार्केट और जब ये तैयार हो गया है तो फिर विदेशी रिटेल चेन से हम कस दिए जायेंगे |

Wednesday, 23 November 2011

'जय हो' से 'जवाब हम देंगे' तक का कांग्रेस का सफ़र...

'जय हो' से 'जवाब हम देंगे' तक का कांग्रेस का सफ़र...
  २००८ में रिलीज़ हुई  एक फिल्म ने अपने देश को ऑस्कर अवार्ड दिलवाया और २००९ के आम चुनाव में कांग्रेस को जीत के मंत्र के रूप में 'जय हो' जैसा थीम सांग दिया | लेकिन उत्तर प्रदेश के विधान सभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने थीम चुनी 'जवाब हम देंगे' ये १९८७ में रिलीज़ हुई जैकी श्रोफ -श्रीदेवी की औसत फिल्म थी |एक सुपरहिट फिल्म से चुराए हुए थीम सॉन्ग ने कांग्रेस को देश की गद्दी दे दी तो उत्तर प्रदेश के विधान सभा चुनाव के लिए एक थकी हुई फिल्म का टाइटिल क्यों लिया गया|अगर कांग्रेस को चुनाव जीतने के लिए फ़िल्मी टोटके की ही जरूरत है तो कुछ अच्छा नाम भी हो सकता था |कांग्रेस खुद ही क्यों सुपरहिट से फ्लॉप की और जा रही है ,नए विचार कांग्रेस को क्यों नहीं मिल पा रहे हैं |

Sunday, 20 November 2011

कांग्रेस दफ्तर से तिहाड़ जेल की सीधी उड़ान ....किंगफिशर से...

कांग्रेस दफ्तर से तिहाड़ जेल की सीधी उड़ान ....किंगफिशर से...
किंगफिशर को भले ही बेलाउट पैकेज न मिला हो लेकिन उसने कांग्रेस सरकार पर मेहरबानी का मन बना लिया है |सूत्रों से जानकारी मिल रही है कि बहुत जल्द कांग्रेस दफ्तर से तिहाड़ जेल तक सीधी उड़ान कि सेवा शुरू करने जा रहा है क्योंकि आने वाले समय में सबसे बिज़ी रूट  यही होगा|उड़ान शुरू होते ही विमान परिचारिका कहेगी कि 'अपनी कुर्सी की पेटी बाँध लीजिये' लेकिन यात्री को पहले से ही मालूम होता है की उसकी कुर्सी को अब कोई नहीं बचा सकता है |


Wednesday, 16 November 2011

पदयात्रा... 
हज़ारों मील सडकें घिस गयी,लाखों का पेट्रोल-डीजल वातावरण में प्रदूषण बढ़ा रहा और ये पूरी कवायद हो रही सिर्फ आपके वोट के लिए| जनता और जनता से जुड़े मुद्दों से दूर हो चुके नेताओं ने मजबूरी का नाम महात्मा गांधी मार्ग अपना लिया है|जिसको देखो वही किसी न किसी रथ पर चढ़ कर यात्रा कर रहा है|आडवानीजी जनचेतना,कलराज-राजनाथ जन स्वाभिमान,नितीश कुमार सेवा यात्रा,अखिलेश यादव क्रांति रथ,बाबा रामदेव जन जागरण यात्रा,श्री श्री रविशंकर भ्रष्टाचार विरोधी यात्रा,राहुल गाँधी भी उत्तर प्रदेश में कोई यात्रा शुरू करने वाले हैं|और मैं यात्राओं को ढूँढने में यात्रा कर रहा हूँ|ऐसी ही एक यात्रा में जब मैंने एक नेताजी की लटक से पूछा कि भाई इस यात्रा से क्या मिलेगा? तो उसने कहा कि हमारे  नेताजी गांधीजी के सिद्धांतो को अपनाते हुए 'पद यात्रा' कर रहे हैं तो मुझे आश्चर्य हुआ ,मैंने पूछा पद यात्रा ? तो उसने जवाब दिया कि हमारे राष्ट्रीय नेता प्रधानमन्त्री  के 'पद' और प्रादेशिक नेता मुख्यमंत्री के 'पद' के लिए यात्रा कर रहे हैं तो हुई न ये 'पदयात्रा'| आप खुद देख लीजिये जिसको-जिसको किसी पद की दरकार है वही यात्रा कर रहा है |चुनावी साल में यात्रा की महत्ता बढ़ जाती है,पिछले कुछ समय में आप जो रास्ता भूल चुके होते हैं इसी बहाने वो रास्ता भी याद आ जाता है| यात्रा के नाम अलग-अलग हैं लेकिन मंजिल सबकी एक है 'कुर्सी'|वहीं दूसरी तरफ आम आदमी वाकई 'पदयात्रा' कर रहा है ,पेट्रोल के दाम बढ़ने से आम आदमी भी अब गांधीजी के सिद्धांत को मानते हुए पदयात्रा को मजबूर है|अडवानी जी की जन चेतना यात्रा के पहले ही दिन येदियुरप्पा जी जेल पहुँच गए तो ऐसा लगा कि जैसे कोई काली बिल्ली रास्ता काट गयी,पहले ही दिन स्पीड ब्रेकर |लेकिन महान नेता ऐसे स्पीड ब्रेकरों से तनिक भी नहीं घबराते हैं|आम आदमी भी यात्रा पर है,दो जून कि रोटी के जुगाड़ कि यात्रा,सर पर छत की यात्रा,बच्चों की पढ़ाई की यात्रा और आम आदमी की यात्रा तो जैसे ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रही है और सरकार इसमें स्पीड ब्रेकर भी बढाते जा रही है|चुनाव बाद नेता जी की यात्रा तो ख़त्म हो जायेगी,ऊपरवाले से दुआ करता हूँ कि आम आदमी की यात्रा को और सुगम बना दे मैं भी उस यात्रा का राही हूँ |उम्मीद है हमारी राहें भी आसान होगी क्योंकि कुछ ऐसा माहौल बनता तो दिख रहा है |एक बोर्ड आम आदमी कि राह पर दिख रहा है कि "सड़क का निर्माण कार्य प्रगति पर है"|

Wednesday, 9 November 2011

११.११.११....उम्मीदों का पिटारा...

११.११.११....उम्मीदों का पिटारा...
सौ बरस में सिर्फ एक बार ही ये तारीख आती है,इस बरस हम भी गवाह बनेगे इस तारीख के और ढूंढेंगे कि इस भाग्यशाली तारीख को कितनों का भाग्य बदल गया | इत्तेफाक से इसी दिन मुझे अपने होमलोन कि चेक पास करवानी है और पिछले महीने ही दशहरा और दीपावली मनाई है,मुझे तो पता चल ही जाएगा  कि इस दिन भाग्य मेरा कितना साथ देगा |सौ साल पहले  इस दिन हम अंग्रेजों  के गुलाम थे  और अब अंग्रेजियत  के गुलाम हैं |तब  हम अंग्रेजों  से लड़ रहे थे  और अब  तो लड़ने  के लिए हमें किसी बाहरी  की  जरूरत  ही नहीं है|बैर  का जो बीज अंग्रेज़ डाल कर गए थे आज वो एक मज़बूत पेड़ बन चुका है और जाति,धर्म,सम्प्रदाय,क्षेत्र  की  टहनियां हमारे खून से पोषण पा रही हैं|रही सही कसर राजनीतिक दल  के नेता इसे खाद-पानी देकर पूरी कर रहे हैं| आज़ादी  के ६४ साल बाद भी क्या  हम इस शुभ  तारीख का स्वागत कर सकते हैं  |क्या इस दिन देश में कोई भूखा नहीं सोयेगा ,आतंक  का शिकार होकर कोई अपना लाल नहीं खोएगा ,कोई किसी ख़ास धर्म,जाति में जन्म लेने पर नहीं रोयेगा  अगर इसका जवाब मिल जाए तो मै कहूँगा कि हम सबको इस तारीख का स्वागत करना चाहिए| बाज़ार में तारीख का टोकरा तैयार हो चुका है इस दिन को बेचने के लिए एस.एम्.एस . तैयार हैं|कुछ लोग इस दिन घर,गाडी लेने के लिए तैयार हैं|अपने शहर की भी बात कर लेता हूँ ,इस शुभ तारीख को पूरे दिन बिजली आएगी,पानी की धार आएगी,कही नहीं होगी लूट,महिलाओं से छेड़खानी की नहीं होगी छूट ..शाम को सड़क किनारे ले सकेंगे दो घूँट तब समझ में आएगी इस तारीख की महिमा|तमाम बुराइयों के बावजूद एक अच्छी बात हो सकती है कुछ महिलाओं ने इस दिन को माँ बनने के लिए चुना है,इस दिन एक माँ की जीत जरूर हो सकती जब इस तारीख को जन्म देने वाले बच्चे के जन्म से पहले ये पता नहीं करेगी कि आनेवाला मेहमान लड़का है या लड़की |

Saturday, 5 November 2011

pehla pyar aur petrol.......

 पहला प्यार और पेट्रोल........    पेट्रोल के दाम बढ़ते ही राजनैतिक दलों द्वारा प्रायोजित धरने,प्रदर्शन,पुतला दहन के दौर शुरू हो गए लेकिन इसी शोर में दब गई एक आशिक की आह!पेट्रोल की आग में भस्म हो गई एक छोटी सी लव स्टोरी |एक आशिक ने अपने खून से लिखे प्रेमपत्र में अपनी मजबूरी को उड़ेल दिया क्योंकि उस नए-नवेले आशिक को पता चल गया था कि अब उसका खून पेट्रोल से सस्ता हो गया है|स्कूल के दिनों की  मोहब्बत में आशिक हर वक्त तैयार रहता है एक आग के दरिये में डूब के जाने के लिए लेकिन उधार कि मोटरसाइकिल में पेट्रोल डलवाना अब उसे आग के समंदर कि तरह लगने लगता है|पेट्रोल के दाम क्या बढे कि मियाँ आशिक को माल रोड का पेट्रोल पम्प अब अपनी मुहब्बत की  मज़ार नज़र आने  लगा|नई-नई लव स्टोरी के फाइनल मैच में पेट्रोल के दाम ने जैसे बारिश कर दी और "मनमोहनी" नियम के आधार पर आशिक को अपनी हार नज़र आने लगी|माशूका के घर,कालेज और कोचिंग के चक्कर अब इस आशिक को किसी आर्ट फिल्म स्टाइल में लगाने पड़ेंगे|लेकिन जैसे ही पेट्रोल के दाम बढाने पर ममता दीदी ने सरकार  को समर्थन वापसी कि धमकी दी तो मासूम आशिक को ममता में अपनी लव स्टोरी में कैरेक्टर रोल निभाने वाला कैरेक्टर नज़र आने लगा जो अस्सी के दशक की  फिल्मों के  तरह हीरो की जान बचाने के लिए अपने सीने पर गोली खा लेता है|लेकिन सरकार ने जैसे ही बढे दाम वापस न लेने का इशारा किया तो इस आशिक के इश्क का टाइटेनिक भी डूबने लगा|अपनी लव स्टोरी को दुखांत की ओर जाते देख श्रीमान आशिक ने वो तीर चलाया जिसके भरोसे कांग्रेस भी है |और लिख डाली देश के सबसे चहेते कुंवारे गांधी को चिट्ठी कि आप जितना उत्तर प्रदेश के गाँव में रहने वाले दलितों से प्रेम करते हैं मै उससे भी ज्यादा अपनी माशूका से मुहब्बत करता हूँ ,लेकिन महंगे हो रहे पेट्रोल के चलते मेरी लव स्टोरी में फुल स्टाप लग गया है|अपनी माशूका से मिलने के लिए इतना बेकरार हूँ जितना तो ये देश सचिन के सौवें शतक   लिए भी नहीं है|सरकारी तेल कंपनियों के घाटे कि दलील के दलदल में सारा देश फँसगया लेकिन मै तो मनरेगा के मजदूर कि तरह अब भी अपने मन से खुशहाली के गाने गाने के लिए कह रहा था|अन्ना के आन्दोलन की  कसम एक छोटी सी टीम बनाने कि तो मैंने भी सोची थी लेकिन  जैसे-जैसे पेट्रोल के दाम बढ़ रहे थे और टीम अन्ना के साथी टूट रहे थे मेरी लव स्टोरी भी बिखर रही थी|उम्मीदों पर दुनिया कायम है ये सोचकर अब मै सिर्फ अपने दिल और पैरों पर भरोसा करने लगा हूँ| मुफ्त की  राय दे रहा हूँ कि मोटरसाइकिल के सहारे अपनी लव स्टोरी आगे बढ़ाना आडवानीजी के प्रधानमन्त्री बनने के सपने देखने  जैसा  रिस्की  काम  है|भरोसा करो  तो सिर्फ अपने ऊपर  सरकार पर भी नहीं नहीं तो दुनिया कहेगी  कि आशिक  का  जनाज़ा  है ज़रा  धूम से निकले  |

Friday, 4 November 2011

आम आदमी 'एंग्री मैन' से लेकर 'हंगरी मैन' बन गया है

आम आदमी 'एंग्री मैन' से लेकर 'हंगरी मैन' बन गया है बढती महंगाई के कारण | समाज का अमीर तबका पेट्रोल के दाम बढ़ने के चलते 'एंग्री मैन' बन चुका है तो गरीब आदमी बढती खाद्य महंगाई दर की वजह से बन गया है 'हंगरी मैन'|हालांकि पेट्रोल के दाम बढ़ने के चलते मार्ग दुर्घटनाओं में कमी आ रही है ,क्योंकि ज्यादातर लोगों ने तो अपने वाहन घर पर खड़े कर दिए हैं और कुछ लोगों ने गाड़ियों को शो पीस की तरह सजा कर रखा है|आने वाले दिनों में चार पहिया सड़क पर चलाने वालों के पीछे इनकम टैक्स विभाग लग जाएगा,घर पर कार होना ही स्टेटस सिम्बल होगा|कार लोन लेने से पहले लेनेवाले का ई.सी.जी.,सीटी स्कैन ,अल्ट्रा साउंड निकाला जाएगा |ताकि ये देखा जाए की कार की किश्त देने वाला कितना मजबूत है,कार के एवरेज से पहले कार लेने वाले के जीवन का एवरेज देखा जाएगा|चलिए अब उनकी बात करते हैं जिनकी बात तो सब करते हैं लेकिन भला कोई नहीं करता ...'गरीब'|गरीब के घर जाकर चाय 
पीने वाले,खाना खाने वाले तो युवा नेता तो देश में हैं लेकिन महंगाई को दूर करने का इलाज उनके पास भी नहीं है|इसलिए अब गरीबआदमी 'हंगरी मैन' बन चुका है |मेरा मानना है की लाख बुराई सही देश में लेकिन गांधी का समय वापस आ रहा है,हर आम आदमी गांधी बन चूका है उसके बदन पर सिर्फ लंगोटी ही बची है और महंगाई के चलते झुकी कमर के लिए लाठी जरूरी हो चुकी है |देश के बड़े नेता अपने मोटापे को कम करने के लिए सर्जरी करवा रहे हैं लेकिन हमारी केंद्र सरकार महंगाई को उस स्तर पर ले आई है की अब किसी को वजन कम करने के लिए सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ेगी|