Sunday, 4 December 2011

जहाँ मॉल-मॉल में सोने की चिड़िया करती है बसेरा ,वो भारत देश है मेरा..

जहाँ मॉल-मॉल में सोने की चिड़िया करती है बसेरा ,वो भारत देश है मेरा......                                                       

पता नहीं क्यों जब-जब रिटेल ऍफ़.डी.आई. से जुडी खबरें देखता-पढता हूँ ये पैरोडी गुनगुनाने लगता हूँ |इस गाने की असल पंक्तियाँ हम सभी ने सुनी होंगी कम से कम २६ जनवरी और १५ अगस्त को तो जरूर सुनी होंगी|अर्थशास्त्र,व्यापार,वाणिज्य के मामले में बहुत कमजोर हूँ ,नहीं जानता कि वालमार्ट ,टेस्को आ जाएगी तो मोहल्ले के भोलू पंसारी कि दुकान बंद हो जाएगी क्या ? दुकान के दरवाज़े  इतने अहम् हो गए हैं कि दिल के दरवाज़े बंद हो जायेंगे|संसद नहीं चल रही है,धरना-प्रदर्शन सब हो रहा है ,अंजाम नहीं जानता |जब भारत सोने की चिड़िया थी तब भी विदेशियों की पहली पसंद थी और अब जब सवा अरब की मार्केट तैयार हो गयी तो विदेशी फिर लूटने आ रहे हैं|हम सब अपनी आबादी को कोसते रहते हैं ,इस आबादी का सिर्फ एक फायदा है वो है मार्केट और जब ये तैयार हो गया है तो फिर विदेशी रिटेल चेन से हम कस दिए जायेंगे |

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