अपनी संसद की 60वी वर्षगांठ हम सब मना रहे हैं,ये हमारे लिए ख़ुशी की बात भी है।..लेकिन क्या हमारे सांसदों को अपनी 'शपथ' याद है और यदि याद है तो वे उस पर कितना अमल करते हैं।पिछले कुछ समय में सांसदों के प्रति असम्मान भी कुछ लोगो ने जताया।समय आ गया है की सांसदों को भी संसद और अपनी गरिमा का ध्यान रखना चाहिए।तमाम अपराधियों ने तो दिल्ली तक का सफ़र तय कर लिया है ,हमारे ईमानदार सांसदों को अब जनता के दिल तक का सफ़र तय करना बाकी है।...
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